Tuesday, February 10, 2026

मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने के फायदे और उनकी देखभाल का सही तरीका

                        

मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने के फायदे और पारंपरिक भारतीय रसोई

मिट्टी के बर्तन में धीमी आंच पर पका भोजन सेहत और स्वाद दोनों बढ़ाता है

​क्या आपको याद है बचपन में मिट्टी के घड़े का वह सोंधा पानी या चूल्हे पर मिट्टी की हांडी में बनी दाल का स्वाद? आज के दौर में हमने अपनी रसोई को नॉन-स्टिक पैन और माइक्रोवेव से तो भर लिया है, लेकिन कहीं न कहीं वह 'असली स्वाद' और 'पोषण' पीछे छूट गया है।

​बढ़ती बीमारियों और मिलावट के इस समय में, लोग अब वापस अपनी पुरानी परंपराओं की ओर मुड़ रहे हैं। मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाना न केवल एक पारंपरिक कला है, बल्कि यह विज्ञान और स्वास्थ्य का एक अनूठा संगम भी है। अगर आप भी अपनी रसोई में मिट्टी के बर्तनों को शामिल करने की सोच रहे हैं, तो यह लेख आपके लिए है। आज हम जानेंगे कि ये बर्तन हमारी सेहत के लिए क्यों जादुई हैं और इनकी देखभाल कैसे की जाए।

​1. मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने के बेमिसाल फायदे

​मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने के लाभ केवल स्वाद तक सीमित नहीं हैं, इसके पीछे गहरे स्वास्थ्य लाभ छिपे हैं:

​पोषक तत्वों का संरक्षण (100% Nutrition): आधुनिक बर्तनों (जैसे एल्युमीनियम) में खाना पकाने पर लगभग 80-90% पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसके विपरीत, मिट्टी के बर्तनों में धीमी आंच पर खाना पकता है, जिससे भोजन के सूक्ष्म पोषक तत्व (Micronutrients) पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं।

​भोजन का PH बैलेंस (Alkaline Nature): मिट्टी की प्रकृति क्षारीय (Alkaline) होती है। जब हम इसमें कोई एसिडिक खाना (जैसे दाल या सब्जी) पकाते हैं, तो यह खाने के एसिड के साथ मिलकर उसे न्यूट्रलाइज कर देती है। इससे खाना पचाने में आसान होता है और एसिडिटी की समस्या नहीं होती।

​कम तेल का उपयोग: मिट्टी के बर्तनों में प्राकृतिक रूप से नमी बनी रहती है। खाना अपनी ही भाप में धीरे-धीरे पकता है, जिससे आपको बहुत अधिक तेल या घी डालने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

​असली सोंधा स्वाद: मिट्टी के सूक्ष्म छिद्रों (Pores) से हवा का आदान-प्रदान होता रहता है, जिससे खाने में एक खास 'सोंधापन' आता है जो आपको किसी और बर्तन में नहीं मिल सकता।

​2. नए मिट्टी के बर्तन को इस्तेमाल के लिए कैसे तैयार करें? (Seasoning Process)

​बाजार से मिट्टी का बर्तन लाते ही सीधे गैस पर न रखें। इसे 'सीजन' करना बहुत ज़रूरी है:

​पानी में डुबोएं: नए बर्तन को कम से कम 18-24 घंटे के लिए साफ पानी से भरी बाल्टी में डुबोकर रखें। इससे बर्तन पानी सोख लेगा और पकाते समय टूटेगा नहीं।

                                                      

मिट्टी के बर्तन में बना खाना और उनकी सही देखभाल का तरीका

​सुखाना: पानी से निकालकर इसे पूरी तरह सूखने दें।

​तेल का लेप: बर्तन के अंदर और बाहर थोड़ा सा खाने वाला तेल (सरसों या तिल का तेल) लगाएं।

​गर्म करना: बर्तन में पानी भरकर उसे धीमी आंच पर 10-15 मिनट के लिए गर्म करें। अब आपका बर्तन खाना बनाने के लिए तैयार है!

​3. मिट्टी के बर्तनों की देखभाल और सफाई का सही तरीका

​चूंकि मिट्टी के बर्तन नाजुक होते हैं, इसलिए इनकी सफाई में सामान्य साबुन या लिक्विड का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए:

​साबुन का प्रयोग न करें: मिट्टी के छिद्र साबुन के रसायनों को सोख सकते हैं, जो बाद में आपके खाने में मिल सकते हैं।

​गर्म पानी और नींबू: सफाई के लिए गर्म पानी और नींबू के छिलकों या बेकिंग सोडा का इस्तेमाल करें।

​नारियल का जूना: बर्तन को रगड़ने के लिए नारियल के रेशों या मुलायम ब्रश का उपयोग करें।

​💡 प्रो-टिप (Pro-Tip):मिट्टी के बर्तनों के लिए 'देसी' नुस्खा

​यदि आपके पास मिट्टी के बर्तन साफ करने के लिए कोई खास ब्रश या साधन नहीं है, तो चिंता न करें! आप लकड़ी की सूखी राख (Wood Ash) या गर्म पानी और नमक के घोल का उपयोग कर सकते हैं। यह न केवल बर्तनों की चिकनाई को पूरी तरह सोख लेता है, बल्कि किसी भी तरह की गंध को दूर कर उन्हें प्राकृतिक रूप से शुद्ध भी कर देता है।

​याद रखें: कभी भी लोहे के जूने (Steel Scrubber) का इस्तेमाल न करें, इससे मिट्टी की सतह खराब हो सकती है।

​पूरी तरह सुखाएं: धोने के बाद बर्तन को धूप में या हवा में अच्छी तरह सुखाकर ही अलमारी में रखें, ताकि उनमें फंगस न लगे।

​4. ध्यान रखने योग्य कुछ जरूरी सावधानियाँ

धीमी आंच (Low Flame): मिट्टी के बर्तनों को हमेशा धीमी या मध्यम आंच पर रखें। अचानक तेज आंच से बर्तन चटक सकता है।

​तापमान का अंतर: गर्म बर्तन को कभी भी सीधे ठंडे फर्श पर या ठंडे पानी के नीचे न रखें। इससे वह टूट सकता है। उसे हमेशा लकड़ी के स्टैंड या कपड़े पर रखें।

​मेटल के चम्मच से बचें: खाना चलाने के लिए लकड़ी के चम्मच (Wooden Spatula) का ही प्रयोग करें।

​5. आम गलतियाँ जो हम अक्सर करते हैं

​भीगने का समय न देना: बिना पानी में भिगोए नया बर्तन इस्तेमाल करना उसे खराब कर सकता है।

​गीले बर्तन में खाना स्टोर करना: खाना पकने के बाद उसे दूसरे बर्तन में निकाल लें। लंबे समय तक मिट्टी के बर्तन में खाना रखने से उसका स्वाद बदल सकता है।

​निष्कर्ष (Conclusion)

​मिट्टी के बर्तन हमारी संस्कृति और सेहत का आधार रहे हैं। शुरुआत में आपको इनकी देखभाल थोड़ी कठिन लग सकती है, लेकिन जब आप इनमें बनी दाल या सब्जी का स्वाद चखेंगे और अपनी सेहत में सुधार देखेंगे, तो यह मेहनत आपको कम लगेगी। अपनी रसोई में कम से कम एक मिट्टी की हांडी ज़रूर शामिल करें—यह आपकी सेहत के लिए एक बेहतरीन निवेश होगा।

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